Swaminarayan cult and their attempt at "abrahamising" hindus
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So, since some months, Swaminarayan Sadhus are constantly provoking various hindu subgroups, castes, sampradays here in Gujarat by outraging sanctity of deities, sants and sadhus in order to prove their superiority
very recently, just a week ago, some publication by their side, made remarks on Dwarikadhish

in form of some "katha" where someone asked should they go to visit Dwarika to get darshan of Bhagwan, to which this swami responded "Waha ab kaha se bhagwan honge? bhagwan ke darshan karne ho toh Vadtal (one of O G Mandir of swaminarayans) jao"

- moreover that story continues that this sajjan's "kuusangi" (opposite of satsangi, means 'bad-associations') family members insisted on taking darshan at Dwarika so they went there, sailed on a boat, but got trapped in some storm, the boat started capsizing, "sajjan realised his mistake and started chanting 'swaminarayan', he found a plank of wood and survived"
Dwarka: The temple town Dwarka witnessed a massive protest today against controversial remarks made by a Swaminarayan saint, questioning the presence of Lord Dwarkadhish in
deshgujarat.com
this is not first and last time they ever outraged hindus like this, their sadhus and followers are constantly making provocative remarks here on others since their very origin, but in past when that cult was emerging they kept their contempt wrapped around bhakti of "krishn-avatar" swaminarayan but now that cult has become enormous they're seemingly going hostile like this
as i was telling, now matter's being noticed by non-gujaratis too
स्वामीनारायण संप्रदाय की एक किताब में हिन्दुओं के आराध्य कृष्ण, राम और शिव का अपमान किया गया है। यह किताब ऑपइंडिया के पास मौजूद है।
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Many gods have been insulted in a single book. Apart from that, there are many books in the Swaminarayan sect, in which many times vain attempts have been made to exalt their own worship by insulting Hindu gods and goddesses. | OpIndia News
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द्वारकाधीश ही नहीं… स्वामीनारायण संप्रदाय की किताब में भगवान राम, शिव और माता चामुंडा का भी अपमान: ऑपइंडिया की पड़ताल में खुलासा, यहाँ देखें सारे सबूत
विवाद की जड़ स्वामीनारायण संप्रदाय की एक पुस्तक है। पुस्तक का नाम है 'श्रीजी संकल्पमूर्ति सद्गुरु श्री गोपालानंद स्वामी की वार्ता'। इस पुस्तक में भगवान द्वारकाधीश (कृष्ण) और पवित्र तीर्थ स्थल द्वारका के बारे में अपमानजनक लेख लिखने का आरोप है।
स्वामीनारायण संप्रदाय की इसी किताब को लेकर बवाल मचा हुआ है
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गुजरात में स्वामीनारायण संप्रदाय विवादों में घिर गया है। स्वामीनारायण संप्रदाय को अपनी विवादास्पद पुस्तकों, उनके धर्मगुरुओं के अपमानजनक बयानों और अपने सिर्फ अपने ही गुरुओं की ही सर्वोच्चता स्थापित करने के लिए हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने जैसे मुद्दों पर हिन्दुओं के क्रोध का सामना करना पड़ रहा है।
जलाराम बापा के
अपमान का विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि स्वामीनारायण संप्रदाय द्वारा द्वारकाधीश भगवान कृष्ण के अपमान का एक और विवाद सामने आ गया है। इसके बाद से द्वारका में स्थिति बिगड़ती जा रही है। इस मामले में ब्रह्म समाज के साथ-साथ पूरे हिंदू समुदाय ने स्वामीनारायण संप्रदाय को 48 घंटे के भीतर माफी माँगने का
अल्टीमेटम दिया है।
विवाद की जड़ स्वामीनारायण संप्रदाय की एक पुस्तक है। पुस्तक का नाम है ‘श्रीजी संकल्पमूर्ति सद्गुरु श्री गोपालानंद स्वामी की वार्ता’। इस पुस्तक में भगवान द्वारकाधीश (कृष्ण) और पवित्र तीर्थ स्थल द्वारका के बारे में अपमानजनक लेख लिखने का आरोप है।
ऑपइंडिया के पास यह पुस्तक मौजूद है। ऑपइंडिया ने जब इस पुस्तक का अध्ययन किया तो कई खुलासे हुए। न केवल भगवान कृष्ण, बल्कि इस पुस्तक में भगवान राम, भगवान शंकर, भगवान हनुमान और भगवान गणपति के बारे में भी अपमानजनक लेख हैं।
इतना ही नहीं, इस पुस्तक में देवी चामुंडा, जिन्हें देवी पार्वती के अवतार के रूप में पूजा जाता है, उनके बारे में भी अपमानजनक बातें लिखी हैं। इस पुस्तक में एक जगह पर कहा गया है कि द्वारका में कोई भगवान ही नहीं है। इसके साथ ही भगवान कृष्ण की महिमा को कम करके ‘स्वामीनारायण’ को सर्वोच्च साबित करने का भी झूठा प्रयास भी किया गया है।
क्या है विवाद?
हाल ही में स्वामीनारायण संप्रदाय के एक स्वामी ने जलाराम बापा के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद पूरे गुजरात में विरोध हुआ था। इसके बाद वीरपुर में माफ़ी माँगी, लेकिन उस घटना के कुछ दिनों बाद स्वामीनारायण संप्रदाय की एक पुस्तक भी विवाद में आ गई है, इसमें आरोप लगाया गया है कि उसमें भगवान कृष्ण का अपमान किया गया है।
सोशल मीडिया पर लोग आरोप लगा रहे हैं कि संप्रदाय बार-बार हिंदू देवी-देवताओं का अपमान कर रहा है। संप्रदाय की श्रीजी संकल्पमूर्ति सद्गुरु श्री गोपालानंद स्वामी की वार्ता नामक पुस्तक में कहानी संख्या 33 में लिखा गया है “द्वारका में भगवान कहाँ होंगे? यदि आप भगवान को देखना चाहते हैं, तो वडताल जाइये।”
इसके साथ ही ब्राह्मण समुदाय को लेकर भी टिप्पणी की गई है। इसके सामने आने के बाद ब्रह्म समाज और हिंदू समाज ने संयुक्त रूप से द्वारका में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वाले हिन्दुओं ने संप्रदाय के स्वामियों को 48 घंटे के भीतर द्वारका आकर भगवान से माफी माँगने का का अल्टीमेटम भी दिया है।
इस पुस्तक में ऐसा क्या लिखा?
विवादास्पद पुस्तक की जाँच करते समय, ऑपइंडिया ने पाया कि कहानी संख्या 33 में स्वामीनारायण संप्रदाय के एक भक्त ‘अबासाहेब’ का उल्लेख है। पुस्तक में कहा गया है कि वह एक चरित्रवान व्यक्ति थे और उन्हें गोपालानंद स्वामी के दर्शन से लाभ हुआ।
पुस्तक आगे बताती है, “उन्होंने एक बार स्वामी से पूछा कि चूंकि उनके परिवार के सदस्य ‘कुसंगी’ हैं, इसलिए वह द्वारका जाने के लिए कह रहे हैं, तो उन्हें इस स्थिति में क्या करना चाहिए?” जवाब में गोपालानंद स्वामी कहते हैं, “द्वारका में भगवान कहाँ हैं? अगर भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन करने हैं तो वडताल चले जाइए। वहाँ भगवान स्वामीनारायण आपकी मनोकामना पूरी करेंगे।”
पुस्तक में आगे लिखा है, “स्वामी की अनुमति लेकर आबासाहेब चल पड़े। लेकिन उनके रिश्तेदार उनके खिलाफ थे, और उन्होंने द्वारका ही जाने पर बहुत जोर दिया। अंततः वे द्वारका की ओर चल पड़े और समुद्र तट पर जाकर जहाज पर सवार हो गए, तभी समुद्र में भयंकर तूफान आ गया।”
पुस्तक बताती है कि इसके बाद आबा साहेब ने सोचा कि यह सब गोपालानंद स्वामी की बात ना मानने के चलते हुआ। आगे इस कहानी कहती है कि डूबते समय आबासाहेब ने ‘स्वामीनारायण-स्वामीनारायण’ का जाप करना शुरू कर दिया।
पुस्तक में लिखा है कि गोपालानंद स्वामी ने आबासाहेब को दर्शन देकर एक लकड़ी का टुकड़ा हाथ में लेने को कहा था, जिसके कारण आबासाहेब उस टुकड़े को हाथ में लेकर समुद्र पार कर गए थे।
पुस्तक में गोपालानंद आबासाहेब से कहते हैं, “आपके परिवार के सदस्य आपके पिछले जन्म के दुश्मन हैं, इसलिए उन्होंने आपको गुमराह किया, लेकिन क्योंकि आप हमारे भक्त हैं, इसलिए हमने आपकी रक्षा की।”
इस कथा में द्वारका जाने की इच्छा रखने वालों को ‘कुसंगी’ बताया गया है। इसके अलावा, यह दावा करना कि द्वारका में कोई भगवान नहीं है, एक तरह से हिन्दू धर्म का अपमान ही है। इसके बाद अपने धर्मगुरु को असल भगवान भी बताया गया है।
पुस्तक में और भी विवादित बातें
इसी किताब की आगे की पड़ताल करने पर ऑपइंडिया ने पाया कि कहानी नंबर 25 में भी एक व्यक्ति का जिक्र है जिसका नाम नारुपंत नाना है। इस कथा में हिन्दू देवी चामुंडा के विषय में अपमानजनक बातें की गई हैं।
इस कहानी के अनुसार यह भक्त नारूपंत एक बार गोपालानंद के पास गए, इस दौरान नारूपंत के माथे पर तिलक देखकर गोपालानंद ने मुस्कुराते हुए उनसे पूछा, ”आप किस भगवान के उपासक हैं?” जवाब में उन्होंने कहा कि वे नारूपंत देवी के उपासक हैं और उनकी मां चामुंडा उनकी कुलदेवी हैं।
इस कहानी में इसके बाद गोपालानंद कहते हैं, “आप भगवान की पूजा करने के बजाय एक ‘छोटी’ देवी की पूजा क्यों करते हैं?” इसी कहानी में पेज नंबर 45 पर गोपालानंद कहते हैं, “देवी-देवताओं की पूजा करने से अंतत: घोर नरक की प्राप्ति होती है, लेकिन कल्याण नहीं होता।”
इसके बाद स्वामी गोपालानंद इस भक्त को कहते हैं, “यदि आप इस जन्म का अर्थ प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप देवी-देवताओं की पूजा छोड़कर हमारे गुरु श्री स्वामीनारायण भगवान की पूजा करें। वह सर्वेश्वर, सभी अवतारों के अवतार, सभी कारणों के कारण, एकमात्र ईश्वर हैं। इससे आपको निश्चित रूप से अटूट सुख की प्राप्ति होगी।”
कहानी में पेज नंबर 46 पर कहा गया है कि माता चामुंडा ने स्वप्न में नरूपंत को दर्शन देकर कहा, “अरे नरूपंत, देखो, हनुमान जी और गणपति दोनों ही स्वामीनारायण का नाम जप रहे हैं, हमारे मित्र माता चामुंडा के सामने कह रहे हैं कि नरूपंत सत्संगी हो गए हैं, इसलिए अब तुम्हें यहाँ से चले जाना चाहिए।”
आगे कहा गया है, “वास्तव में स्वामीनारायण ही एकमात्र भगवान हैं, अब तुम्हें (नरूपंत) उन्हीं की पूजा करनी चाहिए। हम भी अब से वहीं जाएँगे।” इस पूरी वार्ता का निष्कर्ष यह है कि स्वामी ‘स्वामीनारायण’ को ही भगवान बताया गया है और बाकी हिन्दू भगवानों को उनका उपासक बताया गया है।
इसके अलावा इसी पुस्तक में पेज संख्या 103 पर एक विवादित लेख भी है। इसमें कहा गया है, “गोपालानंद के सामने गदा पकड़े हनुमानजी काँप रहे हैं।” इसके अलावा पेज नंबर 44 पर रणछोड़रायजी का भी अपमान किया गया है। इसके अलावा पेज नंबर 49 पर भगवान शंकर को भी स्वामीनारायण और गोपालानंद की पूजा करते हुए दिखाया गया है।
वीडियो में भी की विवादित टिप्पणियाँ
इस पुस्तक पर जारी विवाद के बीच संप्रदाय के एक और स्वामी ने आपत्तिजनक बयान दिया है। सोशल मीडिया पर सामने आए 59 सेकंड के वीडियो में सूरत के वड रोड स्थित स्वामीनारायण गुरुकुल के स्वामी नीलकंठ चरण भगवान कृष्ण के बारे में बात करते नजर आ रहे हैं।
वह वीडियो में बताते हैं, “महाराज कहते हैं कि जब हम द्वारका गए तो द्वारकापति प्रार्थना की कि आप एक बड़ा मंदिर, एक बड़ा मंदिर बनाइए तो मैं वहाँ आकर रहना चाहता हूँ।” आगे स्वामी कहते हैं कि इसके कई वर्षों बाद स्वामी सच्चिदानंद ने मंदिर बनाने का निर्णय लिया और वडताल में मंदिर बनवाया।
स्वामी नीलकंठ चरण ने आगे कहा, “यह भी कहा जाता है कि मंदिर निर्माण के बाद द्वारकापति स्वामी सच्चिदानंद वडताल आये थे।” वायरल वीडियो ने इस विवाद की आग में घी डालने का काम किया है। हालाँकि, पुस्तक पर विवाद भी बना हुआ है।
अन्य किताबों में भी अपमान
ऊपर बताई गई किताब में ही नहीं बल्कि स्वामीनारायण संप्रदाय में कई ऐसी पुस्तकें हैं, जिनमें हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करके अपनी बात ऊँची दिखाने का प्रयास किया गया है। स्वामीनारायण संप्रदाय के तथाकथित संतों ने भी बार-बार भगवान शिव, राम और कृष्ण का मजाक उड़ाया है और उन्हें ‘स्वामीनारायण’ का अंश और सेवक बताया है।
हाल ही में ऐसे कई ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें स्वामीनारायण संप्रदाय के स्वामियों ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया है। हाल ही में एक स्वामी ने हिंदू उत्सव ‘नवरात्रि’ को ‘लवरात्रि’ कहकर उसका अपमान किया था।
भड़के पुजारी और ब्राह्मण
इस पूरे विवाद को लेकर द्वारका के पुजारी ब्राह्मण समुदाय में काफी रोष है। ऑपइंडिया से बात करते हुए गुगली ब्रह्म समाज के अध्यक्ष यज्ञेशभाई उपाध्याय ने कहा कि वह, उनका समाज और पूरा हिंदू समाज भगवान श्री द्वारकाधीश का बार-बार अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।
उन्होंने बताया है कि उनके समुदाय के साथ-साथ पूरे हिंदू समुदाय ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए अधिकारियों को एक याचिका सौंपी है। उन्होंने स्वामीनारायण संप्रदाय की विवादास्पद पुस्तक को भी हटाए जाने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि स्वामीनारायण संप्रदाय के एक स्वामी ने भी द्वारका के गुगली ब्राह्मणों पर टिप्पणी की थी और उन्हें ‘धन हड़पने वाले’ बताया था। उनका आरोप है कि स्वामी ने कहा था कि गुगली ब्राह्मण द्वारका में लोगों को लूटते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि स्वामीनारायण संप्रदाय के संत जो भी बयान देना चाहते हैं, देते हैं, लेकिन उनके पास इसका कोई सबूत नहीं है।